बरेली। बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) ने बिल्डरों, डेवलपर्स और लाइसेंस प्राप्त तकनीकी विशेषज्ञों की समस्याओं के समाधान के लिए सीधे संवाद की पहल तेज कर दी है। इसी क्रम में आयोजित “BDA Vikas Samvad” में प्राधिकरण की उपाध्यक्ष सौम्या पांडे ने बिल्डरों और तकनीकी विशेषज्ञों से अपनी समस्याएं सीधे प्राधिकरण के समक्ष रखने को कहा।
उन्होंने कहा कि छोटी प्रक्रियात्मक कमी या किसी दस्तावेज की पूर्ति के कारण बड़ी विकास परियोजनाएं महीनों तक लंबित नहीं रहनी चाहिए। नियमों के दायरे में जिन समस्याओं का समाधान संभव है, उनका समयबद्ध निस्तारण कराने का प्रयास किया जाएगा।
संवाद कार्यक्रम में 30 से अधिक बिल्डर्स, डेवलपर्स और लाइसेंस प्राप्त तकनीकी प्रोफेशनल्स शामिल हुए। प्रतिभागियों ने मानचित्र स्वीकृति, ऑनलाइन प्रक्रिया, विभिन्न एनओसी, निर्माण कार्य, परियोजना पूर्ण होने के बाद जरूरी प्रमाणपत्र और अन्य प्रक्रियात्मक अड़चनों को अधिकारियों के सामने रखा।
सीधे संवाद से समाधान पर जोर
बीडीए उपाध्यक्ष सौम्या पांडे ने कहा कि प्राधिकरण और बिल्डर्स-डेवलपर्स के बीच नियमित संवाद से ऐसी कई समस्याओं का समाधान किया जा सकता है, जो प्रक्रिया की जानकारी के अभाव या छोटी तकनीकी कमियों के कारण लंबे समय तक लंबित रहती हैं।
उन्होंने कहा कि नियमों के दायरे में आने वाले मामलों में आवश्यक मार्गदर्शन और समाधान उपलब्ध कराया जाएगा। जिन मामलों का तत्काल निस्तारण संभव नहीं होगा, उनमें संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे।
राहत के साथ नियमों का पालन भी जरूरी
संवाद में बिल्डरों को प्रक्रियात्मक समस्याओं के त्वरित समाधान का भरोसा दिया गया, लेकिन यह भी स्पष्ट किया गया कि निर्माण कार्य निर्धारित नियमों और स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप ही किए जाएंगे।
बीडीए की ओर से कहा गया कि स्वीकृत नक्शे के बाद मनमाने तरीके से निर्माण की अनुमति नहीं होगी। परियोजना में किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले नियमानुसार स्वीकृति लेना जरूरी होगा।
परियोजना पूरी होने के बाद आवश्यक प्रमाणपत्र और वैधानिक स्वीकृतियां हासिल करना भी अनिवार्य होगा। निर्धारित औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही खरीदारों को कब्जा देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी चाहिए।
FASTPAS और ऑनलाइन नक्शा स्वीकृति पर चर्चा
बैठक में FASTPAS के माध्यम से ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा हुई। एलटीपी और बिल्डरों ने ऑनलाइन मानचित्र प्रस्तुत करने, दस्तावेजों की पूर्ति और आपत्तियों के निस्तारण से जुड़ी व्यावहारिक दिक्कतें अधिकारियों के सामने रखीं।
प्राधिकरण की ओर से संबंधित प्रक्रियाओं के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन दिया गया। ऑनलाइन व्यवस्था को अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने पर भी जोर दिया गया, जिससे मानचित्र स्वीकृति में अनावश्यक देरी कम हो सके।










