बरेली। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने 27 पासबुक और चेकबुक बरामद होने के बाद जांच का दायरा बढ़ा दिया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन बैंक खातों में अब तक कितनी रकम आई और साइबर फ्रॉड से जुड़ी कितनी धनराशि इन खातों के जरिए इधर से उधर की गई।
गेमिंग और इन्वेस्टमेंट फ्रॉड से जुड़े खातों की जांच
पुलिस को आशंका है कि बरामद बैंक खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन गेमिंग और इन्वेस्टमेंट के नाम पर लोगों से ठगी गई रकम को ट्रांसफर करने में किया गया। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि रकम को अलग-अलग बैंक खातों में भेजकर उसके ट्रेल को जटिल बनाने का प्रयास तो नहीं किया गया।
मामले में एक नाइजीरियाई व्यक्ति की भूमिका भी सामने आई है। पुलिस उसकी पहचान और इस नेटवर्क से जुड़े संपर्कों की पड़ताल कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि साइबर फ्रॉड के इस नेटवर्क के लिए कितने अन्य लोगों के नाम पर बैंक खाते और सिम कार्ड लिए गए।
शोएब और अमल पहले से जेल में
पुलिस के मुताबिक शोएब और अमल सैनी दूसरे मामलों में पहले से जेल में बंद हैं, जबकि फुजैर की तलाश की जा रही है। शोएब को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेने की तैयारी है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान विशाल के नाम पर यूको बैंक में खुले खाते की पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड और सिम समेत अन्य सामान की बरामदगी हो सकती है।
साइबर क्राइम थाना पुलिस ने विशाल और सचिन के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। दोनों को कोर्ट में पेश किया जा रहा है। पुलिस इनके बैंक खातों, मोबाइल डेटा और व्हाट्सएप चैट की जांच कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ा जा सके।
दिल्ली में रैपिडो और स्विगी में काम करते हैं आरोपी
पुलिस के अनुसार विशाल दसवीं पास है और दिल्ली में रैपिडो चलाता है, जबकि सचिन 12वीं पास है और स्विगी में काम करता है। दोनों की उम्र करीब 20-20 साल है और स्कूल के समय से दोस्त बताए जा रहे हैं।
अब पुलिस की जांच का मुख्य बिंदु यह है कि बरामद 27 पासबुक और चेकबुक के जरिए कितने साइबर फ्रॉड की रकम का लेनदेन हुआ और इस नेटवर्क में इनके अलावा कौन-कौन लोग शामिल हैं। पुलिस बैंकिंग ट्रांजेक्शन, मोबाइल डेटा और डिजिटल चैट की मदद से नेटवर्क की अन्य कड़ियों का पता लगाने में जुटी है।












