बरेली। भारतीय जनता पार्टी के बरेली जिला और आंवला संगठन में हुए बड़े फेरबदल ने सियासी हलचल तेज कर दी है। नई टीमों के गठन के बाद जहां कई नेताओं को प्रमोशन मिला है, वहीं कई पुराने चेहरों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। इस बदलाव के बाद सोशल मीडिया पर विरोध के स्वर भी तेज हो गए हैं और संगठन के भीतर नई खेमेबंदी की चर्चा शुरू हो गई है।
बताया जा रहा है कि इस बार संगठन में जिम्मेदारियों का बंटवारा जातीय समीकरण और कार्यकर्ताओं की सक्रियता को ध्यान में रखकर किया गया है। यही वजह रही कि विधायक और सांसद अपने करीबियों को संगठन में सीमित रूप से ही जगह दिला सके।
आंवला में जिलाध्यक्ष आदेश प्रताप सिंह की नई टीम में अहम बदलाव किए गए हैं। पूर्व महामंत्री शिव प्रताप सिंह को उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि रामनिवास मौर्य को दोबारा महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा ओमवीर सिंह गुर्जर, अमिताभ सिंह, राहुल दीक्षित, संजीव सक्सेना, सुभाषनी जायसवाल, नानकराम सागर और राममूर्ति लोधी को उपाध्यक्ष बनाया गया है। ममता अग्रवाल और राजू उपाध्याय को महामंत्री पद दिया गया है, जबकि कई नए चेहरों को मंत्री और अन्य पदों पर जिम्मेदारी सौंपी गई है।
नई टीम में कई पुराने और अनुभवी नेताओं को जगह नहीं मिलने से असंतोष भी सामने आ रहा है। पूर्व महामंत्री संतोष शर्मा, हरवेंद्र यादव, नेमचंद्र मौर्य, शिवेंद्र नाथ चौबे, सुनील गुप्ता, रविंद्र गुर्जर, बबीता गुप्ता और अर्जुन कश्यप जैसे नाम इस बार टीम से बाहर कर दिए गए हैं।
वहीं बरेली जिला संगठन में भी जिलाध्यक्ष सोमपाल शर्मा की नई टीम में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। डॉ. पंकज गंगवार, डॉ. नरेंद्र गंगवार, चंचल गंगवार, नीरेंद्र राठौर, प्रमोद सागर, सम्राट सिंह, सुनील गंगवार और डॉ. मनोज गुप्ता को टीम से बाहर कर दिया गया है। जिला महामंत्री रहे मेघनाथ कठेरिया को डिमोशन करते हुए उपाध्यक्ष बनाया गया है।
नई टीम में अजय सक्सेना, स्वाति कुमार, मेघनाथ कठेरिया, अभय चौहान, राहुल साहू, कुवरसेन मौर्य, आलोक गंगवार और मुकेश राजपूत को जिला उपाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं निर्भय गुर्जर, अंकित शुक्ला और वीरपाल गंगवार को महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा कई कार्यकर्ताओं को मंत्री पद देकर संगठन में नई ऊर्जा लाने की कोशिश की गई है।
इस बड़े फेरबदल से साफ संकेत मिल रहा है कि संगठन अब प्रदर्शन और सक्रियता के आधार पर जिम्मेदारियां तय कर रहा है। नए चेहरों को मौका देकर संगठन को मजबूत करने की रणनीति अपनाई गई है, जबकि निष्क्रिय माने जा रहे नेताओं को बाहर कर सख्त संदेश देने की कोशिश की गई है।












