बरेली। भीषण गर्मी, बढ़ती बिजली कटौती और जनप्रतिनिधियों की लगातार शिकायतों के बीच बरेली में बिजली विभाग के खिलाफ बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। प्रदेश के ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत राज्यमंत्री कैलाश सिंह राजपूत के जिले में आगमन से ठीक पहले बिजली निगम ने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त रुख अपनाते हुए दो जूनियर इंजीनियरों (जेई) को परिनिंदा प्रविष्टि और दो अन्य को अंतिम चेतावनी जारी की है।
रविवार को ऊर्जा मंत्री कलेक्ट्रेट सभागार में विभागीय समीक्षा बैठक करेंगे। बैठक में सांसद, विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी मौजूद रहेंगे। ऐसे में जिले की बिजली व्यवस्था, अघोषित कटौती और उपभोक्ताओं की शिकायतें प्रमुख मुद्दों में शामिल रहने की संभावना है।
जनप्रतिनिधियों की शिकायतों पर हुई कार्रवाई
दरअसल, 23 मई को वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. अरुण कुमार की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में जनप्रतिनिधियों ने बिजली विभाग की कार्यशैली पर नाराजगी जताई थी। शिकायतों में कहा गया था कि कई अधिकारी और जेई न तो उपभोक्ताओं की समस्याएं सुनते हैं और न ही जनप्रतिनिधियों के फोन रिसीव करते हैं। इससे बिजली संकट के दौरान लोगों की परेशानियां और बढ़ गई थीं।
शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मुख्य अभियंता ज्ञान प्रकाश ने कड़ा रुख अपनाया। पहले अधिक शिकायत वाले अधिकारियों का तबादला किया गया और अब अधीक्षण अभियंता नगरीय धर्मेंद्र कुमार सिंह ने तत्कालीन अवर अभियंता मंजीत सिंह और चंद्रमा सिंह को परिनिंदा प्रविष्टि प्रदान की है। वहीं 11 केवी एवं एलटी वर्टिकल के तत्कालीन अवर अभियंता साबिर खान और कृष्णकांत को अंतिम चेतावनी जारी की गई है।
मंत्री की समीक्षा बैठक पर टिकी निगाहें
ऊर्जा मंत्री कैलाश सिंह राजपूत रविवार दोपहर बरेली पहुंचेंगे। सर्किट हाउस में विश्राम के बाद वह कलेक्ट्रेट सभागार में विभागीय समीक्षा बैठक करेंगे। माना जा रहा है कि बैठक में बिजली कटौती, लो-वोल्टेज, ट्रिपिंग और शिकायतों के निस्तारण की स्थिति पर अधिकारियों से जवाब-तलब किया जा सकता है।
मंत्री के दौरे से ठीक पहले हुई यह कार्रवाई विभागीय अधिकारियों के लिए स्पष्ट संदेश मानी जा रही है कि उपभोक्ताओं और जनप्रतिनिधियों की शिकायतों को नजरअंदाज करना अब महंगा पड़ सकता है।
उपभोक्ताओं को सुधार की उम्मीद
लगातार बिजली संकट से जूझ रहे उपभोक्ताओं की निगाहें अब मंत्री की समीक्षा बैठक पर टिकी हैं। लोगों को उम्मीद है कि बैठक के बाद बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सुधार होगा और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ और भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।












