बरेली। रविवार दोपहर करीब दो घंटे हुई मूसलाधार बारिश ने शहर की रफ्तार थाम दी। पॉश इलाकों से लेकर पुराने शहर और निचले क्षेत्रों तक जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। कई प्रमुख सड़कों पर घुटनों तक पानी भर गया, जिससे राहगीरों, वाहन चालकों और दुकानदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। बारिश ने नगर निगम के जल निकासी के दावों की भी पोल खोलकर रख दी।

दरगाह आला हजरत मोड़, मलूकपुर बजरिया, सौदागरान और सिविल लाइंस समेत कई प्रमुख इलाकों में सड़कें पानी में डूब गईं। कई स्थानों पर गंदा पानी दुकानों और घरों के भीतर तक पहुंच गया। जलभराव के कारण दुकानदारों का कारोबार प्रभावित हुआ और सामान खराब होने का खतरा पैदा हो गया।
दुकानदार यासीन रजा ने बताया कि बारिश का पानी सीधे दुकान के अंदर घुस आया। इससे सामान खराब होने की स्थिति बन गई और दुकानदारी पूरी तरह प्रभावित हो गई। उनका कहना था कि जल निकासी की व्यवस्था ठीक नहीं होने के कारण हर तेज बारिश में व्यापारियों को नुकसान झेलना पड़ता है।
पानी से लबालब सड़कों पर गड्ढे दिखाई नहीं देने के कारण कई दोपहिया वाहन चालक फिसलकर गिर गए। कई वाहन पानी में बंद हो गए, जिसके बाद लोगों को उन्हें धक्का लगाकर निकालना पड़ा। दरगाह के पास जलभराव के दौरान एक महिला पानी में गिर गई, जिसे मौके पर मौजूद दुकानदार ने बाहर निकाला।
शहर के बमनपुरी, मॉडल टाउन, स्टेडियम रोड, डीजीपुरम और डेलीपार चौराहे पर भी जलभराव की गंभीर स्थिति रही। कई स्थानों पर घुटनों तक पानी भरने से पैदल चलने वालों के साथ वाहन चालकों को भी खासी दिक्कत हुई।
सीएम ग्रिड योजना के तहत बनाई जा रही सड़कें भी बारिश के पानी में जलमग्न हो गईं। सिविल लाइंस स्थित विकास भवन रोड पर भी काफी देर तक पानी भरा रहा। इससे सड़क निर्माण और जल निकासी व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हुए।
वहीं, तेज बारिश के दौरान पुराने शहर के कांकरटोला स्थित कब्रिस्तान की दीवार भी गिर गई। गनीमत रही कि हादसे के समय आसपास कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
रविवार की बारिश ने एक बार फिर शहर की जल निकासी व्यवस्था की हकीकत सामने ला दी। करोड़ों रुपये खर्च होने और जलभराव से निजात दिलाने के दावों के बावजूद महज दो घंटे की बारिश में शहर के कई हिस्सों का सड़कों से संपर्क मुश्किल हो गया।











