बरेली, 7 सितंबर। रविवार से लगातार हो रही बारिश ने शहर के पुराने और जर्जर मकानों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सोमवार सुबह कुछ ही घंटे के अंतराल में शहर के दो अलग-अलग इलाकों में जर्जर दो मंजिला मकान भरभराकर गिर गए। पहला हादसा सौदागरान में दरगाह आला हजरत के पास हुआ, जबकि दूसरा मकान शहर कोतवाली क्षेत्र के आजमनगर में गिरा।
गनीमत रही कि दोनों मकान पहले से खाली थे, जिससे किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। हालांकि आजमनगर में गली में खड़े तीन स्कूटर मलबे में दब गए। लगातार बारिश के बीच हुए इन हादसों के बाद पुराने और जर्जर मकानों में रहने वाले लोगों में दहशत का माहौल है।
सुबह 5:30 बजे दरगाह आला हजरत के पास गिरा मकान
सौदागरान में दरगाह आला हजरत के पास सोमवार सुबह करीब 5:30 बजे तेज आवाज के साथ करीब 50 साल पुराना दो मंजिला मकान अचानक सड़क पर गिर गया। मकान गिरने की जोरदार आवाज सुनकर आसपास के लोग घरों से बाहर निकल आए और मौके पर भीड़ जमा हो गई।
बताया गया कि करीब 50 गज क्षेत्रफल में बना मकान लंबे समय से जर्जर हालत में था। इसके निचले हिस्से में सुरमे की दुकान संचालित होती थी, जबकि ऊपरी हिस्से में लोग रहते थे। मकान की खराब हालत को देखते हुए कुछ समय पहले ही इसे खाली करा दिया गया था। दुकान भी बंद थी। इसी वजह से हादसे के समय मकान के अंदर कोई मौजूद नहीं था और बड़ा हादसा टल गया।
सड़क पर फैला मलबा, आवाजाही प्रभावित
मकान गिरने के बाद उसका मलबा सड़क पर फैल गया, जिससे दरगाह आला हजरत की ओर आने-जाने वाले लोगों को परेशानी हुई। यह इलाका काफी व्यस्त रहता है और दरगाह पर बड़ी संख्या में जायरीन पहुंचते हैं।
स्थानीय लोगों ने बारिश के बीच ही मलबा हटाने का प्रयास शुरू कर दिया। लोगों का कहना है कि यदि मकान पहले खाली नहीं कराया गया होता तो हादसा गंभीर हो सकता था।
एक घंटे बाद आजमनगर में गिरा 80 साल पुराना मकान
पहले हादसे के करीब एक घंटे बाद शहर कोतवाली क्षेत्र के आजमनगर में हरी मस्जिद के पास दूसरा जर्जर मकान भी गिर गया। सोमवार सुबह करीब 6:30 बजे शरीफ मियां का करीब 80 साल पुराना दो मंजिला मकान अचानक भरभराकर जमींदोज हो गया।
करीब 50 गज में बना यह मकान भी लंबे समय से जर्जर हालत में था और खाली पड़ा हुआ था। मकान गिरने की तेज आवाज से पूरे मोहल्ले में हड़कंप मच गया। आसपास के लोग तत्काल मौके पर पहुंचे। देखते ही देखते मलबा पूरी गली में फैल गया।
हादसे के दौरान गली में खड़े तीन स्कूटर मलबे में दब गए। राहत की बात रही कि मकान के अंदर कोई मौजूद नहीं था और किसी व्यक्ति को गंभीर नुकसान नहीं हुआ।
पड़ोसी मकान की दीवारों में आईं दरारें
आजमनगर में मकान गिरने के बाद आसपास के लोगों की चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, हादसे के बाद बराबर वाले मकान की दीवारों में भी बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई देने लगी हैं। लोगों को आशंका है कि बारिश जारी रही तो आसपास के अन्य कमजोर मकान भी खतरे की जद में आ सकते हैं।
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन और नगर निगम से शहर के पुराने और जर्जर मकानों का तत्काल सर्वे कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि बेहद कमजोर मकानों को चिह्नित कर समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।
नगर निगम की टीम के समय पर नहीं पहुंचने का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मकान गिरने की सूचना नगर निगम को दी गई, लेकिन तत्काल टीम मौके पर नहीं पहुंची। इसके बाद लोगों को स्वयं मजदूरों की मदद से मलबा हटाने की व्यवस्था करनी पड़ी।
लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में पुराने मकानों की स्थिति और खराब हो जाती है। ऐसे में प्रशासन और नगर निगम को हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से ही संवेदनशील मकानों की पहचान करनी चाहिए।
जर्जर मकानों का सर्वे कराने की मांग
शहर के पुराने इलाकों में बड़ी संख्या में दशकों पुराने मकान मौजूद हैं। लगातार बारिश से इन मकानों की नींव और दीवारों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। सोमवार को कुछ ही घंटे के अंतराल में दो पुराने मकानों के गिरने से खतरे की गंभीरता सामने आ गई है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और नगर निगम से संयुक्त अभियान चलाकर जर्जर मकानों का सर्वे कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि बेहद खतरनाक मकानों को चिह्नित कर समय रहते उन्हें खाली कराने की कार्रवाई की जाए, ताकि बारिश के दौरान किसी बड़े हादसे को रोका जा सके।
लोगों का कहना है कि हादसा होने के बाद राहत पहुंचाने से बेहतर है कि खतरे को पहले ही पहचानकर कार्रवाई की जाए। समय रहते जर्जर मकानों की पहचान और आवश्यक कार्रवाई से जनहानि की आशंका को कम किया जा सकता है।












