बरेली। अदालत ने हत्या और गैंगस्टर एक्ट के एक पुराने मामले में तीन आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। तबरेज अहमद (अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष जज गैंगस्टर एक्ट) की अदालत ने भोजीपुरा थाना क्षेत्र के गांव रम्पुरा माफी निवासी हसीन, जाहिद खां और सखावत उर्फ हिप्पी को सात मार्च को दोषमुक्त करार दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मामले की स्वतंत्र विवेचना नहीं की गई और कोई स्वतंत्र गवाह भी पेश नहीं किया गया। साथ ही गैंग चार्ट जारी करते समय अधिकारियों द्वारा पर्याप्त विवेक का इस्तेमाल नहीं किया गया।
मामले में हाफिजगंज थाना व कस्बा निवासी शकील उर्फ पप्पू ने सात अप्रैल 2008 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि वह पत्नी फरजाना और बच्चों के साथ घर में सो रहे थे। रात करीब तीन बजे चार लोग घर में घुस आए और उनके साथ मारपीट करने लगे। शोर सुनकर दूसरे मकान में रह रहे उनके पिता लाठी लेकर आए और हमलावरों को ललकारा, जिस पर हमलावरों ने उनके पिता को गोली मार दी, जिससे उनकी मौत हो गई।
जांच के दौरान विवेचक यतींद्र बाबू भारद्वाज को हसीन के घटना में शामिल होने की जानकारी मिली और 19 अप्रैल को उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में उसने जाहिद और सखावत के नाम बताए। इसके बाद तीन मई को सखावत को तमंचे के साथ गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ हत्या और गैंगस्टर एक्ट की धाराओं में चार्जशीट दाखिल की। हालांकि सुनवाई के दौरान वादी शकील समेत तीन गवाहों ने आरोपियों को पहचानने से इनकार कर दिया और कहा कि वे घटना में शामिल नहीं थे। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि विवेचना में ऐसा कोई साक्ष्य एकत्र नहीं किया गया जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी गिरोह बनाकर अपराध करते थे।
इसके अलावा पत्रावली में ऐसा कोई प्रमाण भी नहीं मिला जिससे यह सिद्ध हो कि जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने संयुक्त बैठक कर उचित विचार-विमर्श के बाद गैंग चार्ट को मंजूरी दी थी। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।












