बरेली। शहर में घरेलू गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी थमने का नाम नहीं ले रही है। आरोप है कि कुछ गैस एजेंसियों से ही सिलेंडरों की सील तोड़कर उन्हें ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है, जिससे जांच के दौरान उन्हें इस्तेमाल किया हुआ दिखाया जा सके।
जानकारी के मुताबिक, घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत बाजार में 1600 रुपये तक पहुंच गई है, जबकि जांच के दौरान एजेंसियों का स्टॉक कागजों में सही पाया जा रहा है।
नाम न छापने की शर्त पर एक होटल कारोबारी ने बताया कि कुछ एजेंसियों पर सिलेंडरों की सील तोड़कर उन्हें ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता है। इससे सिलेंडर को कहीं भी ले जाने में आसानी होती है। अगर रास्ते में चेकिंग होती है तो टूटी सील दिखाकर यह बताया जाता है कि सिलेंडर घर या रिश्तेदारी से लाया जा रहा है।
एक अन्य कारोबारी के अनुसार, कई बार सिलेंडरों को बोरियों में भरकर भी लाया जाता है, जिससे वे आसानी से एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाए जा सकें और किसी को शक न हो।
रीफिल के नाम पर भी खेल
कालाबाजारी करने वाले छोटे सिलेंडरों में गैस भरकर भी मुनाफा कमा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, रीफिल गैस 200 से 250 रुपये प्रति किलोग्राम तक बेची जा रही है। छोटे दुकानदार रोजमर्रा की जरूरत के चलते ऐसे लोगों से संपर्क कर सिलेंडर भरवा रहे हैं।
कारोबारियों का कहना है कि पहले यही गैस करीब 90 रुपये प्रति किलो मिल जाती थी, लेकिन अब इसकी कीमत कई गुना बढ़ गई है।
प्रशासन सख्त, कार्रवाई के संकेत
इस मामले में जिला पूर्ति अधिकारी मनीष कुमार ने बताया कि गैस एजेंसियों की लगातार जांच की जा रही है और कुछ संचालकों को नोटिस भी जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि कालाबाजारी में शामिल पाए जाने वाले एजेंसी संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की कार्रवाई के बावजूद शहर में गैस की कालाबाजारी जारी रहने से आम लोगों और छोटे कारोबारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।












