बरेली। नीरज मौर्य द्वारा लोकसभा में पूछे गए प्रश्न के बाद सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बड़ी संख्या में अपात्र लाभार्थियों का मामला सामने आया है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की ओर से सदन में दिए गए उत्तर में बताया गया कि उत्तर प्रदेश के कई जिलों में राशन कार्डधारकों की समीक्षा के दौरान बड़ी संख्या में फर्जी अथवा अपात्र लाभार्थी चिन्हित किए गए हैं।
मंत्री के उत्तर के अनुसार बरेली में कुल 1,27,725 अपात्र लाभार्थियों की पहचान की गई, जिनमें से 55,498 को सूची से हटाया जा चुका है। वहीं बदायूं में 96,349 अपात्र लाभार्थियों को चिन्हित किया गया, जिनमें से 36,116 को सूची से बाहर कर दिया गया।
सांसद नीरज मौर्य ने लोकसभा में सवाल उठाया था कि बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर सहित अन्य जिलों में अंत्योदय अन्न योजना और प्राथमिकता श्रेणी के अंतर्गत पंजीकृत राशन कार्डधारकों, अपात्र लाभार्थियों के खिलाफ की गई कार्रवाई और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की निगरानी में जनप्रतिनिधियों की भूमिका क्या है। सरकार की ओर से दिए गए जवाब में यह भी स्पष्ट किया गया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत सार्वजनिक वितरण प्रणाली की निगरानी में सांसदों, विधायकों या अन्य जनप्रतिनिधियों की सीधी और औपचारिक भूमिका का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।
सांसद नीरज मौर्य का कहना है कि यदि बड़ी संख्या में अपात्र लाभार्थी वर्षों तक राशन व्यवस्था का लाभ लेते रहे हैं तो यह वितरण प्रणाली की निगरानी और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि जरूरतमंद परिवारों तक अनाज पहुंचाने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली की निगरानी को और मजबूत किया जाना चाहिए तथा स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी स्पष्ट की जानी चाहिए, ताकि योजनाओं का लाभ सही पात्र लोगों तक पहुंच सके।












