बरेली। उत्तर प्रदेश के सरकारी आयुष कॉलेजों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे आयुष इंटर्न्स ने वर्तमान में मिल रहे ₹7,500 प्रतिमाह स्टाइपेंड को बढ़ाकर ₹25,000 प्रतिमाह किए जाने की मांग उठाई है। इंटर्न्स ने जिलाधिकारी के माध्यम से अपनी मांग प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का अनुरोध किया है।
इंटर्न्स का कहना है कि करीब साढ़े चार वर्ष की कठिन चिकित्सा शिक्षा पूरी करने के बाद एक वर्ष की इंटर्नशिप उनके व्यावहारिक चिकित्सा प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण चरण है। इस दौरान वे अस्पतालों में मरीजों की देखभाल, वार्ड ड्यूटी, मरीजों की निगरानी और विभिन्न चिकित्सीय गतिविधियों में योगदान देते हैं। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाला मौजूदा स्टाइपेंड महंगाई को देखते हुए काफी कम है।
₹7,500 स्टाइपेंड में बुनियादी खर्च चलाना मुश्किल
आयुष छात्र एवं इंटर्न्स की ओर से जिलाधिकारी को दिए जाने वाले ज्ञापन में कहा गया है कि ₹7,500 प्रतिमाह यानी करीब ₹250 प्रतिदिन का स्टाइपेंड आवास, भोजन, परिवहन, अध्ययन सामग्री, इंटरनेट और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जैसे खर्चों के लिए पर्याप्त नहीं है। इंटर्न्स के मुताबिक इसके कारण कई प्रशिक्षुओं को अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए भी परिवार पर निर्भर रहना पड़ता है।
इंटर्न्स का कहना है कि इंटर्नशिप के दौरान कई बार कार्य अवधि सामान्य कार्यालय समय से अधिक होती है। अस्पतालों में मरीजों की देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं में जिम्मेदारी निभाने के बावजूद वर्तमान स्टाइपेंड में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है।
आयुष सेवाओं के विस्तार के साथ स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग
इंटर्न्स ने कहा कि सरकार की ओर से आयुष चिकित्सा पद्धतियों को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश और देश में आयुष क्लीनिक, ओपीडी और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हो रहा है। ऐसे में इन सेवाओं में योगदान देने वाले प्रशिक्षु चिकित्सकों के स्टाइपेंड का भी समयानुकूल पुनरीक्षण किया जाना चाहिए।
दूसरे राज्यों का उदाहरण देकर रखी मांग
ज्ञापन में विभिन्न राज्यों में आयुष इंटर्न्स को दिए जाने वाले स्टाइपेंड का उल्लेख करते हुए इंटर्न्स ने दावा किया है कि पश्चिम बंगाल में करीब ₹29,733, बिहार में ₹27,000, कर्नाटक में ₹25,000 और केरल में ₹23,000 तक स्टाइपेंड दिया जाता है। वहीं छत्तीसगढ़ में ₹12,600 से ₹15,900 और महाराष्ट्र में ₹11,000 से ₹14,000 तक स्टाइपेंड मिलने का दावा किया गया है।
इंटर्न्स का कहना है कि इन आंकड़ों की तुलना में उत्तर प्रदेश में ₹7,500 प्रतिमाह का स्टाइपेंड काफी कम है।
15 साल से स्टाइपेंड में बदलाव नहीं होने का दावा
आयुष इंटर्न्स ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में उनका स्टाइपेंड लंबे समय से लगभग ₹7,500 प्रतिमाह के स्तर पर बना हुआ है। इस अवधि में महंगाई, किराया, भोजन, परिवहन और शिक्षा से जुड़े खर्चों में काफी वृद्धि हुई है। ऐसे में स्टाइपेंड का पुनरीक्षण समय की जरूरत है।
MBBS और BDS इंटर्न्स के समान ₹25 हजार स्टाइपेंड की मांग
आयुष इंटर्न्स ने MBBS और BDS इंटर्न्स के स्टाइपेंड में वृद्धि का हवाला देते हुए ₹25,000 प्रतिमाह स्टाइपेंड दिए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि यह मांग किसी अन्य चिकित्सा पद्धति के अधिकार कम करने की नहीं, बल्कि सभी चिकित्सा प्रणालियों के प्रशिक्षु चिकित्सकों के साथ समान और न्यायसंगत व्यवहार सुनिश्चित करने की है।
ज्ञापन में NCISM द्वारा 16 फरवरी 2022 को जारी नियमों के अनुच्छेद-15, अनुभाग (ब) का भी हवाला दिया गया है। इंटर्न्स के अनुसार संबंधित प्रावधान में भुगतान को सरकार के अधीन अन्य चिकित्सा प्रणालियों के अनुरूप रखने और चिकित्सा प्रणालियों के बीच विसंगति नहीं होने की बात कही गई है।
मुख्यमंत्री तक मांग पहुंचाने का अनुरोध
आयुष छात्र एवं इंटर्न्स ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया है कि उनकी मांग को संबंधित उच्च अधिकारियों, राज्य सरकार और आयुष मंत्रालय तक भेजा जाए, ताकि स्टाइपेंड बढ़ाने के संबंध में सकारात्मक निर्णय लिया जा सके।
इंटर्न्स का कहना है कि ₹25,000 प्रतिमाह स्टाइपेंड की मांग बढ़ती महंगाई, अस्पतालों में उनकी जिम्मेदारियों और समानता के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए न्यायसंगत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस विषय पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए प्रदेश के आयुष इंटर्न्स के हित में उचित निर्णय लेगी।










