फर्जी GST फर्मों के जरिए करोड़ों की बिलिंग का आरोप, ₹2.41 करोड़ से अधिक ITC लेन-देन की जांच

संवाददाता रोहिताश कुमार
बरेली। फर्जी GST फर्मों के जरिए कथित तौर पर करोड़ों रुपये की बिलिंग और ITC ट्रांसफर के मामले में पुलिस की जांच जारी है। गिरफ्तार आरोपी मुताहिर अली से पूछताछ में GST यूजर आईडी, पासवर्ड, OTP और फर्मों के बैंक खातों से जुड़े कई अहम दावे सामने आए हैं। पुलिस इन दावों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर मामले की विवेचना कर रही है।
GST यूजर आईडी और पासवर्ड रखने का दावा
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि तीनों फर्मों की GST यूजर आईडी, पासवर्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज संबंधित लोगों के पास रहते थे। GST से जुड़ी किसी प्रक्रिया के लिए OTP की जरूरत पड़ने पर उससे OTP मांगा जाता था।
आरोपी के मुताबिक वह अपने भाई से OTP लेकर संबंधित लोगों को उपलब्ध करा देता था। पुलिस के अनुसार वर्ष 2023 में मुशफिक अली के पास GST विभाग का नोटिस पहुंचने के बाद उसे कथित गतिविधियों की जानकारी हुई। आरोपी का दावा है कि शिकायत किए जाने पर संबंधित लोगों ने मामला निपटाने का भरोसा दिया था।
फर्जी इनवॉइस और ITC ट्रांसफर की जानकारी होने का दावा
पुलिस का कहना है कि पूछताछ में आरोपी ने बताया कि फर्मों के बैंक खातों में होने वाले लेन-देन, कथित फर्जी इनवॉइस तैयार करने और किस फर्म के नाम पर ITC पास की जा रही थी, इसकी जानकारी मुबारक खां उर्फ उमेर, मुताहिर खां उर्फ उजैर और अख्तर रसूल को थी।
हालांकि, पुलिस पूछताछ में सामने आए इन बयानों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस मामले की विवेचना और दस्तावेजों की जांच के आधार पर तथ्यों का सत्यापन कर रही है।
मोबाइल से कराया गया GST पंजीकरण
पुलिस के मुताबिक आरोपी ने पूछताछ में बताया कि 18 सितंबर 2020 को उसके मोबाइल फोन के जरिए उसके भाई के नाम से विजन ट्रेडर्स का GST पंजीकरण कराया गया था। पंजीकरण के दौरान उसके भाई का मोबाइल नंबर दर्ज किया गया था और OTP के लिए उससे दो-तीन बार संपर्क किया गया।
आरोपी के अनुसार विजन ट्रेडर्स के नाम पर वास्तविक कारोबार या माल की आपूर्ति किए बिना करोड़ों रुपये की बिलिंग की गई और उसके आधार पर कथित तौर पर फर्जी ITC का लेन-देन किया गया।
पुलिस के मुताबिक आरोपी ने यह भी दावा किया कि कथित कारोबार से मिलने वाली रकम या कमीशन संबंधित लोगों के बीच बांटा जाता था और उसे भी नकद धनराशि दिए जाने की बात कही गई है। इन दावों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
₹2.41 करोड़ से अधिक के ITC लेन-देन की जांच
राज्य कर विभाग की जांच में सामने आए ₹2,41,32,710.62 के ITC लेन-देन ने मामले की गंभीरता बढ़ा दी है। पुलिस और विभाग अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि कथित फर्जी बिलिंग के जरिए कितनी फर्मों को लाभ पहुंचाया गया और इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं।
जांच एजेंसियां फर्जी GST पंजीकरण, इनवॉइस, बैंक खातों के लेन-देन और ITC ट्रांसफर से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रही हैं।
अन्य आरोपियों की भूमिका भी जांच के घेरे में
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के दौरान सामने आए तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर विवेचना आगे बढ़ाई जा रही है। फर्जी फर्मों के जरिए हुए कथित लेन-देन में शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित फर्जी ITC नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा है और इसके जरिए किन-किन फर्मों को लाभ पहुंचाया गया।
गिरफ्तार आरोपी
मुताहिर अली पुत्र रफील हसन, उम्र करीब 44 वर्ष, निवासी मकान नंबर 64, मोहल्ला सादात, थाना जहानाबाद, जनपद पीलीभीत।
बरामदगी
एक मोटरोला कंपनी का मोबाइल फोन।
मुकदमा
मु0अ0सं0 112/2026, धारा 318(4), 316(2), 338, 336(3), 340(2) BNS, थाना भोजीपुरा, जनपद बरेली।
पुलिस टीम
प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार धीर, थाना कैंट, बरेली
उपनिरीक्षक सुशील कुमार, थाना भोजीपुरा
हेड कांस्टेबल संदीप
कांस्टेबल राकेश
पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है। पूछताछ में सामने आए तथ्यों, GST रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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Author: Jageshwar News

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