बरेली/नई दिल्ली। नीरज मौर्य द्वारा संसद में उठाए गए सवालों पर केंद्र सरकार ने दो अहम जानकारियां दी हैं। जवाब में सामने आया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में तकनीकी खामियों के चलते हजारों पात्र गरीब परिवार अब भी लाभ से वंचित हैं, वहीं बरेली और बदायूं के पारंपरिक जरी-जरदोजी कारीगरों के लिए फिलहाल किसी विशेष कौशल केंद्र की योजना नहीं है।
सांसद नीरज मौर्य ने भारत सरकार से पूछा था कि बरेली, बदायूं और शाहजहांपुर जिलों में बड़ी संख्या में पात्र गरीब परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना से वंचित क्यों रह गए। उन्होंने खासतौर पर रामगंगा नदी किनारे रहने वाले भूमिहीन और बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए अलग प्रावधान की जानकारी भी मांगी।
हजारों मकान बने, फिर भी कई परिवार बाहर
सरकार की ओर से दिए गए जवाब में बताया गया कि इन जिलों में बड़ी संख्या में मकान स्वीकृत और पूर्ण किए गए हैं।
बरेली में 9,201 स्वीकृत, 9,127 पूर्ण
बदायूं में 27,230 स्वीकृत, 27,086 पूर्ण
शाहजहांपुर में 31,160 स्वीकृत, 30,476 पूर्ण
हालांकि सांसद ने कहा कि असली समस्या उन परिवारों की है, जिनका नाम वर्ष 2011 की सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना सूची में शामिल ही नहीं हो पाया। ऐसे परिवारों के लिए कोई स्पष्ट वैकल्पिक व्यवस्था जवाब में सामने नहीं आई।
कारीगरों के लिए कौशल केंद्र का प्रस्ताव नहीं
सांसद ने जरी-जरदोजी और बेंत-बांस शिल्प से जुड़े कारीगरों को आधुनिक बाजार, डिजाइन और ई-कॉमर्स से जोड़ने के लिए विशेष कौशल केंद्र की मांग भी उठाई थी। इस पर कौशल विकास राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने बताया कि फिलहाल ऐसे किसी विशेष केंद्र की स्थापना का प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
हालांकि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत वर्ष 2022-23 से 2025-26 के बीच बरेली में 621 युवाओं को पारंपरिक हस्त कढ़ाई से जुड़े प्रशिक्षण दिए गए हैं।
दोबारा सर्वे और नई पहल की मांग
सांसद नीरज मौर्य ने कहा कि सरकार को चाहिए कि आवास योजना से छूटे पात्र परिवारों की पहचान के लिए दोबारा सर्वे कराया जाए। साथ ही पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक बाजार से जोड़ने के लिए विशेष कौशल केंद्र स्थापित किए जाएं, ताकि गरीब परिवारों और युवाओं को वास्तविक लाभ मिल सके।












