बरेली: एक प्रकरण में कथित कूटरचित दस्तावेज, फर्जी हस्ताक्षर और मोहर के इस्तेमाल तथा झूठे शपथ-पत्र प्रस्तुत किए जाने के आरोपों को लेकर शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अब तक प्रभावी कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है।
प्रार्थना पत्र में पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कर जवाबदेही तय करने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई किए जाने का अनुरोध किया है।
डीएम से निष्पक्ष जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। शिकायत में कथित रूप से कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, फर्जी हस्ताक्षर और मोहर का इस्तेमाल करने तथा झूठे शपथ-पत्र प्रस्तुत करने में शामिल लोगों की भूमिका की जांच किए जाने की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि जांच के दौरान यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
फोरेंसिक जांच से सामने आ सकती है सच्चाई
मामले में दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। संबंधित अधिकारियों के वास्तविक हस्ताक्षरों और कथित हस्ताक्षरों का मिलान, मोहरों की जांच, शपथ-पत्रों की सत्यता तथा आवेदन जमा किए जाने की प्रक्रिया की पड़ताल से मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
इसके अलावा एसडीएम सदर कार्यालय के रिकॉर्ड की जांच से यह भी पता लगाया जा सकता है कि कथित दस्तावेज किस स्तर पर तैयार किए गए और उनका इस्तेमाल किसके द्वारा किया गया। जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
रिकॉर्ड की जांच पर टिकी निगाहें
अब पूरे मामले में जिलाधिकारी स्तर से होने वाली जांच और संबंधित कार्यालयों के रिकॉर्ड की पड़ताल पर नजर है। दस्तावेजों और हस्ताक्षरों की विशेषज्ञ जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और इस प्रकरण में किसकी जिम्मेदारी बनती है।












