बरेली। इज्जतनगर के गांव रहपुरा चौधरी में हुए सनसनीखेज डबल मर्डर ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। इस मामले के मुख्य आरोपी अफसर खान को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया, लेकिन घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली और लापरवाही पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पंचायत में खूनी वारदात
सोमवार दोपहर समझौते के लिए एक स्थानीय व्यक्ति के घर पंचायत बुलाई गई थी। यहां अफसर खान, उसकी पत्नी सायमा, सास आसमां (50) और साला आदिल (22) मौजूद थे। शुरुआत में कहासुनी हुई, जो जल्द ही हिंसक विवाद में बदल गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विवाद बढ़ने पर अफसर ने अचानक चाकू निकालकर हमला कर दिया। उसने साले आदिल और सास आसमां पर ताबड़तोड़ वार किए, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पत्नी सायमा गंभीर रूप से घायल हो गई।
फरारी और मुठभेड़ में अंत
वारदात के बाद आरोपी खून से सना चाकू लेकर फरार हो गया। पूरी घटना सीसीटीवी में कैद हो गई, जिसे पुलिस ने कब्जे में लेकर जांच शुरू की। पुलिस ने आरोपी की तलाश में कई टीमें लगाईं और मंगलवार सुबह उसे घेर लिया।
पुलिस के अनुसार, खुद को घिरा देख आरोपी ने फायरिंग की, जिसके जवाब में हुई मुठभेड़ में वह घायल हो गया। अस्पताल ले जाने पर उसे मृत घोषित कर दिया गया।
खौफनाक आपराधिक इतिहास
अफसर खान का आपराधिक अतीत भी बेहद गंभीर रहा है। वर्ष 2004 में, महज 16 साल की उम्र में उसने अपनी मामी के साथ मिलकर अपने मामा की हत्या कर दी थी। इस मामले में वह जेल गया और वर्ष 2015 में जमानत पर बाहर आया था।
परिजनों के अनुसार, वह नशे का आदी था और पत्नी के साथ अक्सर मारपीट करता था। घर खर्च को लेकर विवाद आम बात थी।
पहले से मिली शिकायत, फिर भी कार्रवाई नहीं
घटना से एक दिन पहले सायमा ने पुलिस को कॉल कर मदद मांगी थी और थाने में तहरीर देकर अपनी जान को खतरा बताया था। आरोप है कि पुलिस ने इसे घरेलू विवाद मानकर गंभीरता से नहीं लिया।
परिवार का कहना है कि आरोपी पहले भी चाकू और तमंचा दिखाकर धमका चुका था, लेकिन उसके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
उठ रहे बड़े सवाल
इस पूरे मामले ने पुलिस व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं—
पहले मिली शिकायत पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
आरोपी को समय रहते गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया?
आपराधिक इतिहास के बावजूद निगरानी क्यों नहीं रखी गई?
पंचायत में हथियार लेकर पहुंचने से पहले रोकथाम क्यों नहीं हुई?
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
इस दर्दनाक घटना के बाद परिवार पूरी तरह बिखर गया है। एक ओर मां और भाई की मौत से घर उजड़ गया, वहीं घायल सायमा अस्पताल में जिंदगी के लिए जूझ रही है। मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया भी उठ गया।
यह घटना न सिर्फ एक जघन्य अपराध है, बल्कि यह चेतावनी भी है कि घरेलू हिंसा और आपराधिक प्रवृत्ति को नजरअंदाज करना कितना घातक साबित हो सकता है।












