संवाददाता रोहिताश कुमार
बरेली, 2 सितंबर। सरकारी शिकायत पोर्टल आईजीआरएस पर शिकायत को सिर्फ ‘निस्तारित’ दर्ज कर देना अब अधिकारियों के लिए पर्याप्त नहीं होगा। बरेली में अगस्त की आईजीआरएस फीडबैक रिपोर्ट में सात अधिकारियों से संबंधित शिकायतों में फरियादी असंतुष्ट पाए गए। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने सभी सात अधिकारियों के वेतन आहरण पर अगले आदेश तक रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
सात शिकायतें, सातों में संतुष्टि स्कोर शून्य
एक अगस्त से एक सितंबर तक आईजीआरएस फीडबैक की समीक्षा के दौरान सात अधिकारियों से संबंधित शिकायतें सामने आईं। इनमें अधिशासी अभियंता बाढ़ कार्य मंडल, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, जिला उपायुक्त मनरेगा, जिला क्षय रोग अधिकारी, पशु चिकित्सा अधिकारी शेरगढ़, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी दमखोदा, प्राचार्य डायट और सब रजिस्ट्रार फरीदपुर शामिल हैं।
इन सभी मामलों में शिकायतकर्ताओं ने शिकायतों के निस्तारण को संतोषजनक नहीं माना। यानी पोर्टल पर शिकायतें निस्तारित दर्ज होने के बावजूद फरियादियों को अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी।
अब केवल जवाब लगाकर शिकायत बंद करना नहीं होगा
जिलाधिकारी की कार्रवाई के बाद अधिकारियों को स्पष्ट संदेश गया है कि आईजीआरएस पर महज जवाब लगाकर शिकायत बंद करना पर्याप्त नहीं माना जाएगा। शिकायत की वास्तविक स्थिति की जांच, मौके के तथ्यों का सत्यापन और शिकायतकर्ता को राहत दिलाने वाला निस्तारण जरूरी होगा।
प्रशासन की ओर से अधिकारियों को शिकायतों की गंभीरता से जांच कर तथ्यपरक कार्रवाई करने तथा ऐसा निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे फरियादी वास्तव में संतुष्ट हो सके।
खराब फीडबैक पर तय होगी जवाबदेही
अब शिकायत के निस्तारण के साथ शिकायतकर्ता के फीडबैक पर भी प्रशासन की नजर रहेगी। असंतोषजनक फीडबैक मिलने पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
वेतन आहरण पर रोक की कार्रवाई से साफ संकेत है कि जनशिकायतों के मामले में महज कागजी कार्रवाई या लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। प्रशासन शिकायत के अंतिम परिणाम के साथ फरियादी की संतुष्टि को भी अधिकारियों की कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण आधार बना रहा है।











